मजबूत लोकतंत्र

0
9

Advertisement

देश की 15वीं राष्ट्रपति के रूप में सोमवार को द्रौपदी मुर्मू ने शपथ ली। मुर्मू देश की सबसे युवा और आजादी के बाद जन्मी पहली राष्ट्रपति हैं। इस सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन होने वाली वह पहली आदिवासी नेता हैं। आजादी का अमृत महोत्सव मनाने के मौके पर किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए यह बड़े मान की बात है कि देश के सबसे वंचित तबके की कोई महिला देश के सर्वोच्च पद पर पहुंची है। यह ऐतिहासिक घटना दुनियाभर के लिए एक मिसाल है।

Advertisement

वे जनजातीय समाज से हैं और उन्हें निगम पार्षद से लेकर देश की राष्ट्रपति बनने तक का अवसर मिला है। यह भारत के लोकतंत्र और गणतंत्र के शानदार सफर का एक पड़ाव है। द्रौपदी मुर्मू विधायक और ओडिशा सरकार में मंत्री भी रहीं। उन्हें झारखंड के राज्यपाल पद पर भी काम करने का मौका मिला। वह तब राष्ट्रीय सुर्खियों में आईं जब भाजपा की ही रघुवर दास सरकार के पारित दो बिलों पर उन्होंने हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया और बिलों को लौटा दिया। उन बिलों से आदिवासियों में अलगाव की भावना पैदा होने का भय था।

Advertisement

कमोबेश विपक्ष के उन चेहरों के लिए यह उदाहरण ही पर्याप्त है कि मुर्मू ‘मूर्ति’ नहीं, कडक़ संवैधानिक शख्सियत भी हैं। पूरे देश और देश के करीब 1.30 लाख गांवों के करीब 11 करोड़ आदिवासियों का विश्वास है कि वह अपनी नई भूमिका में संविधान की संरक्षक साबित होंगी। उन्होंने कहा कि एक संसदीय लोकतंत्र के रूप में 75 वर्षों में भारत ने प्रगति के संकल्प को सहभागिता एवं सर्व-सम्मति से आगे बढ़ाया है। अमृतकाल की सिद्धि का रास्ता दो पटरियों ‘सबका प्रयास और सबका कर्तव्य’ पर आगे बढ़ेगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आज का भाषण उनकी वास्तविक आशाओं को प्रतिबिंबित करता है। वे अंधेरों को चीर कर राष्ट्रीय पटल पर उभरी हैं। द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बनने से बहुस्तरीय संदेश प्रवाहित होंगे। उम्मीद की जानी चाहिए कि आदिवासी समाज को देखने और आंकने का नजरिया भी बदलेगा। देश जंगलात की दुनिया में झांक कर देखेगा और उसकी तकलीफों को समझने और साझा करने की कोशिश करेगा।

सांस्कृतिक-सामाजिक और धार्मिक विविधताओं से भरे देश में आजादी के सात दशक बाद भी वंचित तबकों को प्रतिनिधित्व और भागीदारी हासिल करने के लिए कई स्तरों पर संघर्ष से गुजरना पड़ता है। अब द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बन जाने के बाद यह कहा जा सकता है कि देश ने अपने लोकतांत्रिक स्वरूप को दिनोंदिन मजबूत किया है और इसमें सबकी सहभागिता सुनिश्चित करने की ओर ठोस कदम बढ़ाए हैं।

ये भी पढ़ें- सतर्कता ही बचाव

 

Advertisement