ब्रिटेन के पीएम की दौड़ में नारायणमूर्ति के दामाद ऋषि सुनक का मुकाबला अब सिर्फ लिज ट्रस से

0
9


लंदन । ब्रितानी इतिहास में संभवत: नया कीर्तिमान रचा जाने वाला है यहां इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति के दामाद भारतीय मूल के ऋषि सुनक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनने के करीब हैं। कंजर्वेटिव पार्टी के नेता के तौर पर होने वाली वोटिंग का अंतिम राउंड बचा है और सुनक के सामने विदेश मंत्री लिज ट्रूस हैं। लिज, प्राइम मिनिस्‍टर बोरिस जॉनसन की फेवरिट हैं। वो चाहते हैं कि ट्रूस, देश की अगली पीएम बनें। मगर पार्टी की नजरें सुनक पर हैं।

अगर सुनक देश के पीएम बनते हैं तो इतिहास में पहला मौका होगा जब एक हिंदू और ब्रिटिश इंडियन को देश की कमान सौंपी जाएगी। ऋषि सुनक, भारतीय टेक कंपनी इंफोसिस के को-फाउंडर नारायणमूर्ति के दामाद हैं और वो रेस में हमेशा से आगे चल रहे हैं। बुधवार को वोटिंग का जो राउंड हुआ उसमें सुनक को 137 वोट्स मिले। जबकि ट्रूस को 113 वोट्स हासिल हुए।

पार्टी के 16000 सदस्य अब अपने नेता का चुनाव करेंगे और पोस्‍टल बैलेट के जरिए सुनक या ट्रूस में से किसी एक को चुना जाएगा। 2 सितंबर को बैलेट क्‍लोज हो जाएंगे। इसके बाद टोरी बैकबेंचर्स 1922 कमेटी के चेयरमैन सर ग्राहम बैडी 5 सितंबर को कंजर्वेटिव पार्टी के नेता और देश के नए प्राइम मिनिस्‍टर के नाम का ऐलान करेंगे। हालांकि पूर्व वित्त मंत्री सुनक (42) के लिए रास्ता इसलिए आसान दिखाई नहीं देता क्योंकि उन्हें अब टोरी सदस्यों के बीच बहुत कठिन मतदान का सामना करना पड़ेगा।

इस दौर के मतदान में हाल के सर्वेक्षणों में आंकड़े उनकी प्रतिद्वंद्वी लिज़ ट्रस के पक्ष में होने की बात कही गई है। अब सुनक और ट्रस दो ही दावेदार प्रधानमंत्री पद की दौड़ में बचे हैं जिनके बीच सोमवार को लाइव डिबेट होगी।

सुनक ने इस महीने की शुरुआत में नेतृत्व के लिए अपनी दावेदारी पेश किए जाने के बाद से बहस और साक्षात्कार की एक श्रृंखला में कहा, ‘यह नेतृत्व प्रतियोगिता सिर्फ हमारी पार्टी के नेता होने से ज्यादा है, यह हमारे ब्रिटेन के संरक्षक बनने के बारे में है।’ उन्होंने 1960 के दशक में पूर्वी अफ्रीका से आए अपने भारतीय परिवार की कहानी के साथ अपना प्रयास शुरू करने से लेकर व्यक्तिगत और पेशेवर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।

सुनक ने कहा, ‘मेरी मां ने फार्मासिस्ट बनने के वास्ते योग्यता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत की। वह मेरे पिता, एक एनएचएस (राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा) जीपी से मिलीं, और वे साउथेम्प्टन में बस गए। उनकी कहानी यहीं खत्म नहीं हुई, लेकिन यहीं से मेरी कहानी शुरू हुई।’