बीयूएमएस डॉक्टर एलोपैथी से कर रहा था बच्ची का इलाज, अस्पताल सील

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बरेली, अमृत विचार। जिले में झोलाछापों का मकड़जाल फैला हुआ है। कई अस्पताल मानक पर ताक पर रख मरीजों का इलाज कर रहे हैं। गुरुवार को मुख्य चिकित्साधिकारी के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आंवला में संचालित हो रहे अस्पताल पर छापेमारी की। इस दौरान अस्पताल में बीयूएमएस डॉक्टर एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति से बच्ची का इलाज कर रहा था। इसके अलावा कई अनियमितताएं मिलीं। इस पर टीम ने अस्पताल को सील कर दिया।

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स्वास्थ्य विभाग की टीम दोपहर करीब 1 बजे आंवला के स्टेशन रोड स्थित शिफा हॉस्पिटल पहुंची। इसमें 12 बेड थे। आबिद अंसारी नाम का युवक बच्ची का इलाज कर रहा था। इस पर टीम ने मेडिकल संबंधी दस्तावेज दिखाने को कहा तो युवक ने दस्तावेज दिखाए, जिस पर युवक के नाम पर बीयूएमएस डिग्री थी।

आरोप है कि वह एलोपैथिक दवा से बच्ची का गलत इलाज कर रहे थे। इतना ही नहीं अस्पताल में जिन डॉक्टरों के पैनल की सूची चस्पा थी, इन नामों का एक भी डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं था। अस्पताल के पंजीयन दस्तावेजों में भी कई अनियमितताएं मिलीं। टीम ने अस्पताल को सीलकर बीयूएमएस डॉक्टर को नोटिस जारी किया है। टीम में एसीएमओ डॉ. आरएन गिरी, झोलाछाप नियंत्रण सेल प्रभारी डॉ. सौरभ सिंह व महेंद्र यादव शामिल रहे।

पैरवी नहीं आई काम
जब टीम शिफा हॉस्पिटल में सील लगा रही थी, तभी अस्पताल संचालक स्वास्थ्य विभाग में ही कार्यरत अपने जानकारों को फोन लगाकर कार्रवाई से बचने का प्रयास में लग गया, लेकिन टीम नहीं मानी। हालांकि, जिन विभागीय कारिंदों की सरपरस्ती में यह अस्पताल चल रहा था, उनका दूसरे जनपद में तबादला हो चुका है। इसके बाद भी उनकी सक्रियता यहां बनी हुई है।

क्लीनिक बंद कर भाग गए झोलाछाप
टीम के छापे की भनक लगते ही झोलाछाप दुकानें बंद कर भाग गए। डॉ. सौरभ सिंह ने बताया कि अवैध अस्पतालों और झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। जिन संचालकों ने अभी तक अस्पताल के पंजीयन और नवीनीकरण नहीं कराया है। वे जल्द करा लें अनियमितताएं मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

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