बच्चे के लिए माँ का दूध का बन सकता है जहर ,यहां जाने किस स्थति में स्तनपान करवाना बन सकता है जानलेवा

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बच्चो को ब्रेस्टफीडिंग कराना बहुत जरूरी है यह आपके बच्चे के लिए सम्पूर्ण आहार  होता है बच्चे के जन्म से लेकर 6 महीने तक डॉक्टर सिर्फ मां का दूध पिलाने की सलाह देते हैं उन्हें पानी पिलाने से भी मना करते हैं अगर आपका बेबी बेबी प्रीमेच्योर हुआ है तब तो उसे ब्रेस्ट फीडिंग  कराना और भी ज्यादा जरूरी होता है क्योंकि मां के दूध में पोषक तत्व होते हैं कुछ ऐसी परिस्थिति है जहां कुछ निश्चित दवाओं का सेवन कर रही अन्य कारणों से मां को स्तनपान नहीं करा ना चाहिए। 
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 अगर माँ ब्रुसोलिस  से पीड़ित है उसका इलाज नहीं चल रहा है उचित इलाज के बाद ब्रेस्टफीडिंग  शुरू कर सकती है यही नहीं गर्भावस्था को रोकने या समाप्त करने के लिए वहां कुछ दवाई ले रही है   गर्भावस्था को समाप्त करने के लिए उपयोग की जाने वाली कुछ दवाइयों में हार्मोनल गुण होते हैं और इन दवाओं को लेने वाली मां के लिए स्तनपान कराना वर्जित है। 

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कुछ मामले माताओं के प्रत्यक्ष स्तनपान की अनुमति नहीं दी जाती है लेकिन स्तन  का दूध निकालकर शिशु को पिला सकती है ऐसी स्थिति में प्रसव के 5 दिन पहले प्रसव के 2 दिन बाद मां को यदि  हर्पीज ज़ोस्टर या वैरीसेला  संक्रमण हो जाता है तो मां बच्चे को सीधा स्तनपान नहीं करा सकती स्तन से दूध निकालकर पिला सकती है। 

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माँ को यदि को एक्टिव तपेदिक है और इसका इलाज नहीं हुआ है मां 2 सप्ताह के उचित उपचार के बाद और जब यह पुष्टि हो चुकी है कि रोग संक्रामक नहीं है तब स्तनपान फिर से शुरू कर सकती है मां को रेडियोपैक पदार्थ लगाकर डायग्नोस्टिक इमेजिंग किया गया है। एक बार शरीर से डाई पूरी तरह से निकलने के बाद ही मां स्तनपान फिर से शुरू कर सकती है।