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दिल्ली से 40 से 50 हजार में खरीदी कबाड़ गाड़ी और बना दी एंबुलेंस

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बरेली, अमृत विचार। इमरजेंसी सेवा देने वाले एंबुलेंस का हर मायने में फिट होना जरूरी है मगर छानबीन में चौंकाने वाली बात सामने आई कि करीब 375 में से 156 एंबुलेंस का फिटनेस ही नहीं है। बताया जा रहा है दिल्ली में कबाड़ा हो चुके वाहनों को बरेली में लाकर उन्हें एंबुलेंस का नाम देकर मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। इस मामले में परिवहन विभाग और पुलिस की सुस्ती की वजह से शहर में बिना पंजीकरण के भी हजारों एंबुलेंस दौड़ रही हैं।

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दिल्ली में कबाड़ हो चुकी वैन को खरीदने के बाद लोगों ने उसे एंबुलेंस बनाकर कमाई का नया जरिया बना लिया है। जिले में 289 प्राइवेट और 86 सरकारी एंबुलेंस पंजीकृत है। जिसमें से 104 प्राइवेट और 52 सरकारी एंबुलेंस अनफिट होने के बाद भी दौड़ रही है। जबकि तबीयत बिगड़ने व हादसा होने पर लोग एंबुलेंस के लिए कॉल करते हैं ताकि जल्द से जल्द अस्पताल पहुंच सकें, मगर जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण मरीज अनफिट एंबुलेंस से ढोए जा रहे हैं। इन एंबुलेंस से हादसे का खतरा हर समय बना रहता है। शहर में कई जगह पर प्राइवेट एंबुलेंस का अड्डे बना लिए गए है। मामला जानकारी में होने के बाद भी परिवहन विभाग और पुलिस की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

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हाईवे किनारे पुलिस की सेटिंग से चल रहा खेल
हाईवे किनारे कई नामी अस्पतालों की एंबुलेंस खड़ी रहती है। इन एंबुलेंस पर किसी हॉस्पिटल का नाम नहीं होता है, लेकिन इनकी थानों व चौकियां से सेटिंग होती है। जैसे ही कोई एक्सीडेंट होता ह, तो ये मरीजों को सिर्फ स्ट्रेचर पर रखकर हॉस्पिटल पहुंचा देती हैं। कई एंबुलेंस में तो ऑक्सीजन किट भी नहीं होती है। इनमें से ही अधिकांश एंबुलेंस एलपीजी से चल रही हैं।

एंबुलेंस चालक वसूलते है मनमाना किराया
शहर में 1 हजार से अधिक एंबुलेंस दौड़ रही है। शहर के गांधी उद्यान और पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बड़ी संख्या में एंबुलेंस खड़ी रहती है। पोस्टमार्टम होने के बाद शव को ले जाने के लिए कई बार एंबुलेंस चालक आपस में भी भिड़ जाते हैं। जबकि छोटी सी दूरी पर भी जाने के लिए एंबुलेंस चालक मनमाना किराया वसूल लेते है। कोरोना काल में अधिक किराया लेने के कई मामले सामने आने के बाद एंबुलेंस चालक पर रिपोर्ट दर्ज करने के बाद एंबुलेंस का किराया भी निर्धारित किया गया था।

हादसे में सात लोगों की गई थी जान
शंखा पुल के पास एंबुलेंस व मिनी ट्रक की भिड़ंत से सात लोगों की मौत हो गई थी। घटना में चालक के अतिरिक्त एक ही परिवार के छह लोग थे। सभी एंबुलेंस में सवार थे। घटना तब हुई जब एंंबुलेंस पीलीभीत के मरीज को लेकर दिल्ली से आ रही थी। हादसे की वजह जहां चालक को नींद आना बताई जा रही थी, जिससे वह डिवाइडर से टकराने के बाद मिनी ट्रक में घुस गया था।

जिले में 289 प्राइवेट और 86 सरकारी एंबुलेंस पंजीकृत हैं जिनमें से 104 प्राइवेट और 52 सरकारी एंबुलेंस अनफिट होने के बाद भी दौड़ रही है। अनफिट एंबुलेंस के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।- दिनेश कुमार सिंह, आरटीओ प्रवर्तन

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