टेक्नोलॉजी की रफ्तार में डिजिटल फ्रॉड की चुनौतियां बेशुमार

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नई दिल्ली। भारत में 15 अगस्त, 1995 को सरकार ने इंटरनेट सेवा शुरू की थी। उसके 3 साल बाद सरकार ने निजी ऑपरेटरों द्वारा देश में इंटरनेट सेवाओं को उपलब्ध कराने का दरवाजा खोल दिया था। तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि आज 27 साल बाद भारत के दूर दराज के गाँवो में जहाँ सही से सड़क नहीं हैं, मूलभूत सुविधाओं का अभाव है वहाँ इंटरनेट पहुँच चूका है। सरकार द्वारा भी इस छेत्र में बहुत तेजी के साथ बदलाव के प्रयास किए जा रहें हैं।

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इसी महीने 1 तारीख (01 अगस्त 2022 )को सरकार द्वारा की गई 5 जी स्पेक्ट्रम (5G Spectrum) की नीलामी खत्म हुई है। यह नीलामी सात दिनों तक चली। 5जी नेटवर्क की स्पीड, जो अभी हम इस्तेमाल कर रहें हैं 4 जी नेटवर्क के मुकाबले 10 गुना तक ज्यादा होगी। जाहिर है कि हम इस नेटवर्क के जरिए कुछ ही सेकेंडों में कोई भी फाइल डाउनलोड कर सकेंगे और डिजिटल भारत बनाने का सरकार का सपना साकार होता दिख रहा है। लेकिन दूरसंचार में हुई इस क्रांति की कुछ चुनौतियां भी हैं। तो सबसे पहले कुछ चर्चित मामलों को हम जान लेते हैं।

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-अगस्त 2019 में संसद सत्र के दौरान डॉक्टर मनमोहन सिंह के दूसरे कार्यकाल में केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री रहीं परनीत कौर को किसी ने फ़ोन कर खुद को एसबीआई का बैंक मैनेजर बताते हुए कहा कि अपना सारा बैंक ब्यौरा बता दीजिये आपकी सैलरी डालनी है, क्योंकि देर होने पर सैलरी अटक जाएगी. इसके बाद परनीत कौर ने उस व्यक्ति को सारी जानकारी दे दी और उसी समय उनके खाते से 23 लाख रुपये उड़ गए।

-2016 में महानायक अमिताभ बच्चन से भी किसी ने खुद को बैंक कर्मचारी बताकर उनसे एटीएम नंबर और पिन नंबर हासिल किया और 5 लाख रुपए उड़ा दिए।

-जून 2021 में राजस्थान में किसी बड़े पुलिस अधिकारी से 97 लाख रुपए कुछ इसी तरह ठगे गए।

-सिर्फ यही मामले चर्चा में नहीं रहे और भी कई मामले है। केरल के एक सांसद से 1.60 लाख का डिजिटल फ्रॉड हुआ। यूपी के बीजेपी विधायक से 5000 का फ्रॉड, ओएनजीसी की सेवानिवृत्त महिला अफसर से 65.95 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी, पीएमओ के अफसर से ठगी…. ऐसे हज़ारों मामले एफआईआर के रूप में थानों में दर्ज है।

ये सारे मामले डिजिटल लेनदेन से जुड़े हुए थे और ज्यादातर मामलों में तरीका एक ही था। लेकिन अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स के लिए लिखने वाली दीक्षा भारद्वाज की रिपोर्ट बताती है कि किस तरह डिजिटल जालसाजों ने नए नए तरीके इजाद कर लिए हैं।

एक महीनें में 61 हजार से ज्यादा शिकायतें
इस रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि मात्र एक महीने (मई 2022) में सरकार को डिजिटल फ्रॉड से जुडी हुई 61,100 शिक़ायतें मिली हैं। सबसे ज्यादा 33,712 शिक़ायतें यूपीआई से संबंधित हैं, इसके बाद 10,898 शिक़ायतें डेबिट या क्रेडिट कार्ड से जुड़ी धोखाधड़ी की, इंटरनेट बैंकिंग से संबंधित धोखाधड़ी (7,099), वॉयस फ़िशिंग कॉल (5,503), ई-वॉलेट चोरी (3,010), डीमैट खाता धोखाधड़ी (769) और ईमेल अधिग्रहण (187) शामिल हैं।

तेजी के साथ बढ़ रहा डिजिटल लेनदेन
पिछले जुलाई के महीनें में मात्र यूपीआई के द्वारा लेनदेन 600 करोड़ पार कर गया है जो कि अपने आप में रिकॉर्ड है। नेशनल पेमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के मुताबिक जुलाई महीने में में 6.28 अरब ट्रांजैक्शन हुए, अगर इसको रुपयों में देखा जाय तो करीब 10.62 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। पिछले साल जुलाई के महीने की अपेक्षा इस साल जुलाई महीने में यूपीआई से लेनदेन में 7.16 फीसदी बढ़ा है।

डिजिटल फ्रॉड रोकने के सरकार के प्रयास
इसी साल अप्रैल के महीनें में गृह मंत्रालय (MHA) ने साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को देखते हुए उसके रोकथाम पर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से @Cyberdost ट्विटर हैंडल लॉन्च किया था और तमाम संस्थानों को ‘साइबर जागरूकता दिवस’ जैसे कार्यक्रम आयोजित करने का अनुरोध किया था। बैंको की तरफ से भी लगातार डिजिटल फ्रॉड से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा हैं। लेकिन फिर भी डिजिटल फ्रॉड के ये आंकड़े चौंकाने वाले हैं।

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