Tuesday, June 28, 2022
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जवान रहने के लिए 650 लड़कियों का किया कत्ल

लंदन। फिल्मों में आपने ड्रैकुला या खून पीने वाले पिशाच के बारे में जरूर सुना होगा। लेकिन, क्या आपने असल जिंदगी में किसी ड्रैकुला के बारे में सुना है। इतिहास में असल जिंदगी की एक ड्रैकुला रह चुकी है। एलिजाबेथ बाथरी ने 650 युवा लड़कियों को प्रताड़ित किया और बाद में उनकी हत्या कर दी। लेकिन वह इतने पर ही नहीं रूकी। बाद में उसने इन लड़कियों का खून पी लिया। यहां तक की कई बार उसने खून से स्नान भी किया। कहा जाता है कि ब्रैम स्टोकर की ड्रैकुला को भी उसी ने प्रेरित किया था।

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एलिजाबेथ बाथरी इतिहास की सबसे खूंखार सीरियल किलर मानी जाती है। उसने आज के रोमनिया के ट्रांसिलवेनिया के किले 650 सुंदर लड़कियों को तड़पा-तड़पा कर मार डाला। वह इतनी खतरनाक थी कि माना जाता है आयरिशा लेखक ब्रैन स्टोकर का उपन्यास ड्रैकुला एलिजाबेथ से प्रेरित था। ड्रैकुला एलिजाबेथ का जन्म 1560 में हंगरी में हुआ था। उसकी खूबसबरती के चर्चे दूर-दूर तक थे। एलिजाबेथ का मानना था कि जवान लड़कियों का खून किसी भी व्यक्ति को जवान रख सकता है।

बड़ी तन्ख्वाह का लालच देकर करती थी महल में बंद
एलिजाबेथ लड़कियों को बड़ी तनख्वाह वाली नौकरी की पेशकश करती थी। वह लड़कियों को उनके परिवार से दूर ले आती थी और उन्हें अपने महल में बंद कर देती थी। एलिजाबेथ उन्हें पीट कर या भूख से मारने से पहले तड़पाती थी। वह लड़कियों के नाखूनों के बीच पिन जड़ देती थी। इसके अलावा वह उनके शरीर पर शहद डाल कर उन्हें मधुमक्खी या चीटिंयों के पास छोड़ देती थी। जिस किसी ने उसकी यातनाएं देखीं वह पूरी जिंदगी खौफ में रहा।

हाथ, चेहरे और कंधों को कैंची से काट देती थी
प्रत्यक्षदर्शियों ने बाद में दावा किया कि एलिजाबेथ अपने शिकारों को चाकू घोंप देती थी। वह उनके स्तन, हाथ, चेहरे और कंथों को कैंची से काट देती थी। इसके अलावा उनके होठ में सुई चुभो देती थी। कई बार वह होठों को गर्म लोहे से जला देती थी। बाद में कहा गया कि वह पीड़ितों के खून में नहाती थी। उसका मानना था कि जवान लड़कियों का खून उसे हमेशा जवान रख सकता है। एक समय ऐसा आया जब गरीब घरों की लड़कियां उसके यहां काम नहीं करती थीं।

गरीबों ने बंद किया आना तो अमीरों को बनाया शिकार
जब गरीब लड़कियां उसके शिकंजे में नहीं फंसीं तो उसने अमीर घरों की लड़कियों को निशाना बनाना शुरू किया। अच्छी आदतें सिखाने के नाम पर वह लड़कियों को बुलाती, लेकिन जो भी महल के अंदर गई वह कभी वापस नहीं लौटी। संदेहजनक स्थितियों को देखते हुए 1610 में एक पादरी ने उसकी शिकायत की, जिसके बाद जांच शुरू हुई। उसके चार पसंदीदा नौकर और दोस्तों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें से तीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और एक को उम्रकैद दी गई। ऐलिजाबेथ के परिवार के रसूख के कारण उसे अदालत में पेश नहीं किया गया, लेकिन वह किले के एक छोटे से कमरे में कैद कर दी गई। तीन साल की कैद के बाद उसकी मौत हो गई।

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