खुद अपनी ही घोषणाओं की शिवराज को नहीं है सुध!

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क्या हुआ तेरा वादा – अटल जी को भूले शिवराज : खुद अपनी ही घोषणाओं की शिवराज को नहीं है सुध!

 

खुद अपनी ही घोषणाओं की शिवराज को नही सुध, बननी थी लाईब्रेरी ,इन्क्यूबेशन सेंटर―शुरू होने थे पुरस्कार लेकिन अभी भी है सिर्फ इंतजार! 

 

 

बात सन् 2018 की है लेकिन उस बात की वजनदारी अब भी कायम है। सरकार-नेताओं के दाँत दिखाने के कुछ और खाने के कुछ होते हैं।जनता तो सोती रहती है लेकिन जनहित का दंभ भरने वाले छुटभैय्यों से लेकर बड़भैय्ये भी जब अपना ‘कथनी’ ही भूल जाए।उस पर भी जब मामला उनके राजनैतिक-वैचारिक पुरखों के सम्मान,स्मृतियों से जुड़ा हुआ हो ,तब ऐसे में नेताओं की निष्ठा, सत्यता व प्रतिबद्धता पर यक्ष प्रश्न लग जाता है।

 

https://twitter.com/ChouhanShivraj/status/1030809457591181312?s=19

श्रध्देय अटल बिहारी वाजपेयी जी के देहावसान के बाद 18 अगस्त 2018 को तीन ट्वीट एवं फेसबुक पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अटल जी की स्मृति की चिरस्मरणीय बनाने के लिए तीन घोषणाएं की थीं ,जिनमें प्रदेश की सात स्मार्ट सिटी में इक्यूबेशन सेंटर, लाईब्रेरी व तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा की थी।

https://twitter.com/ChouhanShivraj/status/1030807669215391744?s=19

इस स्मार्ट सिटी वाली सूची में सतना व प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, और सागर आदि जिले शामिल थे। इन स्मार्ट सिटी में अटल जी की स्मृति में लाईब्रेरी स्थापित करने की घोषणा की गई थी।

https://twitter.com/ChouhanShivraj/status/1030807906034171904?s=19

जिसके बारे में शिवराज सिंह चौहान ने अपने ट्वीट व फेसबुक पोस्ट के माध्यम से बताया था कि –

प्रदेश के सभी 7 स्मार्ट सिटी भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर और सतना में अटल जी की स्मृति में लाईब्रेरी स्थापित होगी, जो सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस और शोध केंद्र के रूप में विकसित होगा। यहाँ युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की व्यवस्था होगी।

https://m.facebook.com/ChouhanShivraj/posts/1786239124793879/

मध्यप्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में अटल जी की जीवनी को शामिल करने की घोषणा करते एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा था कि:―

“स्मार्ट सिटी में आदरणीय अटल जी के नाम पर इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित होंगे, जिसमें विद्यार्थियों को स्टार्टअप के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा स्कूल शिक्षा में अगले सत्र से बच्चों को प्रेरित करने के लिए आदरणीय अटल जी की जीवनी पाठ्यक्रम में शामिल की जाएगी।”

इसी तरह अटल जी के नाम पर तीन राष्ट्रीय पुरुस्कारों की घोषणा के लिए ट्वीट करते हुए उन्होंने बतलाया था-

“आदरणीय अटल जी की स्मृति में प्रति वर्ष 5-5 लाख रुपए की सम्मान राशि के तीन राष्ट्रीय पुरस्कार दिए जाएंगे। साहित्य के क्षेत्र में उदीयमान कवि, मीडिया के क्षेत्र में पत्रकार और सुशासन के लिए उत्कृष्ट अधिकारी को सम्मानित करेंगे।”

हाल फिलहाल जब तक शिवराज अपनी घोषणा पर अमल लाने की ओर आगे बढ़ते तभी नवम्बर 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को कांग्रेस से शिकस्त खानी पड़ गई ,तथा राज्य में कांग्रेस सरकार बन गई।
ऐसे में शिवराज सहित पूरी भाजपा अपनी घोषणाओं को ही भूल गई । हालांकि विपक्ष में रहते हुए भी उन घोषणाओं को पूरा करने की यदि दृढ़इच्छाशक्ति का परिचय शिवराज और भाजपा दिखलाती ,तब भी इन पर अमलीजामा पहनाया जा सकता था।

शिवराज घोषणाओं के बारे में भले भुलक्कड़ साबित हुए:—

शिवराज घोषणाओं के बारे में भले भुलक्कड़ साबित हुए लेकिन वे किस्मत के बड़े धनी हैं। सियासी उठापटक के लम्बे नाटकीय दौर के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया धड़े के भाजपा में शामिल होने के कारण अन्ततोगत्वा 23मार्च 2020 को शिवराज के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में पुनः भाजपा की ताजपोशी हो गई ।किन्तु तब भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व भाजपा को अपनी कथनी याद नहीं आ पाई।

सत्ता वापसी के बाद अटल जी की जयंती और पुण्यतिथि के कई सारे मौके भी आए -गए हो गए लेकिन अटल जी का मालाजाप करने वाली भाजपा,संगठन के पदाधिकारियों व स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को यह याद नहीं आया कि सन् 2018 में उन्होंने अटल जी की स्मृति में घोषणाएं की थीं। ऐसा हो भी क्यों न!?यदि नेताओं की कथनी और करनी में फर्क न हो तो वे नेता ही क्यों कहलाएँगे?

 

शिवराज व ‘भाजपा’ दोनों के लिए अटल जी केवल सहानुभूति हासिल करने का एक माध्यम बस रह गए हैं?

 

दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि सामान्य वादे या घोषणाएं तो अक्सर शिवराज और भाजपाई नेता भूलते ही रहते हैं । लेकिन श्रध्देय अटल बिहारी वाजपेयी जी की स्मृति को चिरस्मरणीय बनाने के लिए की गई घोषणाएं भूल जाना बड़े ही आश्चर्य की बात है? इससे क्या यह माना जाए कि ‘शिवराज व भाजपा’ दोनों के लिए अटल जी केवल सहानुभूति हासिल करने का एक माध्यम बस रह गए हैं?

शिवराजसिंह चौहान की घोषणाओं के वर्षों बीत जाने के इस दौर में सतना जिले सहित इस घोषणा में शामिल अन्य शहरों के भाजपाई नेताओं, सांसदों व विधायकों तक को इसकी कोई फिक्रमन्दी नहीं रही। इसी का परिणाम है कि कुर्ता-पैजामा पैहनकर सियासी आत्ममुग्धता के चक्कर में भाजपाई इस तरह मदमस्त हुए कि उन्हें अपने पुरखों के नाम पर की गई घोषणाएँ एवं वादे तक भी याद नहीं रह पाए!!