किसानों के आगे सूखे का संकट, धान, उड़द की फसल को भारी नुकसान

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बरेली, अमृत विचार। बीती साल तीन दिन की आफत की बारिश ने किसानों की फसल बर्बाद कर दी थी, लेकिन इस बार किसानों को बारिश न होने से सूखे की मार झेलना पड़ रही है। किसानों को बारिश से आस थी कि इस बार फसल शायद ठीक-ठाक हो जाए, लेकिन हालात कुछ और ही बयां कर रहें हैं। बीते साल जो गांव बाढ़ प्रभावित रहे थे, वह इस साल सूखा प्रभावित हैं। रामगंगा के आसपास आने वाले किसानों की माने तो धान व उरद की फसल सूखे के कारण बर्बादी के कगार पर है।

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रामगंगा नदी के क्षेत्र में अखा, ढका, खजुआई, नंदगांव चुराकिसनपुर, सुजनपुर, धनेटी देवचरा, गैनी, मिलक बजरिया, रोधी फरीदापुर, सराय, ऊचा गांव समेत लगभग 25 गांव आते हैं। बाढ़ के समय सबसे ज्यादा यही गांव प्रभावित रहते हैं। बीते साल अक्टूबर माह में हुई तीन दिन की बारिश में किसानों की धान, समेत सब्जी की खेती नष्ट हो गई थी। इस बार मानसून खत्म होने जा रहा है।

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किसानों की आखें बारिश को तरस गईं हैं। अखा में रहने बुजुर्ग नंदलाल ने बताया कि बीती साल बारिश में उन लोगों की फसल तबाह हो गई थी। इस बार सूखे के कारण गेहूं और उड़द की फसल सूखे की चपेट में आ गई है। किसान खुद भारी लागत खर्च कर खेतों में पानी लगा रहा है।

लेखपाल के चहेतों को मिला मुआवजा
बीती साल बाढ़ प्रभावित किसानों को सरकार ने उनके नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की बात कही थी। गांव के लोगों का आरोप है कि लेखपाल ने अपने चहेतों को मुआवजे की रकम दिला दी। जबकी जिस किसान को नुकसान हुआ था। वह बंछित रह गया था। आज तक ऐसे किसानों को मुआवजा नहीं मिला है।

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