कश्मीर में आतंक…

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जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर से आतंकी घटनाएं तेज हो गई हैं। कश्मीरी पंडित राहुल भट्ट की हत्या के एक दिन बाद शुक्रवार को आतंकियों ने पुलिस कांस्टेबल रियाज अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी। कश्मीर में कुछ ही घंटों के भीतर लक्ष्य बना कर की गई हत्या की ये दूसरी घटना है। राहुल की हत्या सरकारी दफ्तर में घुसकर की गई थी।

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उसकी नियुक्ति कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए लाए गए विशेष पैकेज के तहत हुई थी। राज्य में बढ़ती आतंकवादी घटनाओं और विशेष रूप से कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाने को लेकर एक बार फिर से सवाल खड़े हो गए हैं। हत्या की जिम्मेदारी कश्मीर टाइगर्स नाम के आतंकी संगठन ने ली है। इस संगठन के बारे में जांच एजेंसियों के पास ज्यादा जानकारी नहीं है। घाटी में तनाव के माहौल के बीच कश्मीरी पंडितों का आरोप है कि उन्हें लक्ष्य कर लगातार उनके ऊपर हमले हो रहे हैं और सरकार उन्हें सुरक्षा देने में विफल रही है।
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद आतंकवाद और आतंकवाद निरोधक अभियानों के आंकड़े बताते हैं कि कश्मीर में हिंसा में कमी आई। जम्मू-कश्मीर में 75 आतंकवादी इस साल मुठभेड़ में मारे गए। इन आतंकवादियों में 21 विदेशी थे। पाकिस्तान घाटी में एक बार फिर से आतंकवाद को बढ़ाना चाहता है जिससे कि वो कश्मीर को भारत की मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिशों में खलल डाल सके।

स्वीकार करना होगा कि कश्मीर में निर्मम हत्याओं की शक्ल में एक नई चुनौती उठ खड़ी हुई है। इनमें खास तौर से उन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, जो अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। प्रवासी मजदूर हैं व अधिकारी हैं। घाटी में हिंदुओं पर हमले का सिलसिला पिछले साल मेडिकल शॉप के मालिक माखन लाल बिंदरू की हत्या से शुरू हुआ था।

पुलिस के अनुसार, आतंकियों ने इस साल अब तक 28 नागरिकों की हत्या की। जानकारों के मुताबिक लश्कर ए तैयबा से जुड़ा संगठन द रजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) टारगेट किलिंग को अंजाम दे रहा है। अप्रैल के पहले सप्ताह में चार प्रवासी मजदूरों पर टीआरएफ आतंकियों ने हमला किया था। 19 मार्च को आतंकियों ने पुलवामा जिले में गैर कश्मीरी कारपेंटर को गोली मारकर घायल कर दिया था।

वह उत्तर प्रदेश के बिजनौर से है। कश्मीर में लक्ष्य बनाकर की जा रही हत्याओं को आतंकियों की नई रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। केंद्र सरकार को कश्मीर की ताजा घटनाओं का पर्याप्त विवेचन कर एक बार फिर आतंकियों को नेस्तनाबूद करने की नीति बनानी होगी।