एसजीपीजीआई में देश का सबसे बड़ा आकस्मिक चिकित्सा व गुर्दा प्रत्यारोपण केंद्र शुरू, मरीजों को मिलेगी राहत

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लखनऊ। एसजीपीजीआई के आकस्मिक चिकित्सा एवं गुर्दा प्रत्यारोपण केंद्र की शुरूआत आज पूरी तरह से हो गयी । इससे पहले 17 मई को इस सेंटर की शुरूआत आंशिक रूप से की जा चुकी है। किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए यह सेंटर काफी राहत देने वाला होगा। बताया जा रहा है कि रीनल ट्रांसप्लांट सेंटर शुरू होने से एसजीपीजीआइ देश का सबसे बड़ा गुर्दा प्रत्यारोपण केंद्र बन गया है। यहां पर इमरजेंसी , नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग अपना कार्य करेंगे।

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दरअसल,एसजीपीजीआई का नेफ्रोलॉजी और गुर्दा प्रत्यारोपण विभाग में उत्तर प्रदेश,बिहार, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश से मरीज अपना इलाज कराने पहुंचते हैं,इतना ही नहीं पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश से किडनी की गंभीर बीमारी झेल रहे मरीज यहां आते हैं। आज मंगलवार के दिन नेफ्रोलॉजी विभाग ने एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। नेफ्रोलॉजी विभाग को अब नये नाम इमरजेंसी एंड रीनल ट्रांसप्लांट सेंटर के रूप में जाना जायेगा।

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यह उत्तर प्रदेश सरकार का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है। बीते 8 जनवरी को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ईएमआरटीसी भवन का उद्घाटन किया था । तब से लेकर आज तक विभाग की स्थानांतरण प्रक्रिया जारी थी, कड़ी मेहनत के बाद पीजीआई प्रशासन ने नेफ्रोलॉजी विभाग को इस केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया।

बताया जा रहा है कि इस सेंटर में 97 सामान्य और निजी बिस्तरों के साथ 111 डायलिसिस केंद्र बनाये गये हैं। इसके अलावा यह सेंटर रिवर्स ऑस्मोसिस वाटर प्लांट की सबसे उन्नत प्रणाली के साथ-साथ डायलीसेट की केंद्रीय वितरण प्रणाली (सीडीएस) से लैस है, बताया जा रहा है कि भारत में इसी एकमात्र सरकारी संस्थान मे यह सुविधा उपलब्ध है।

प्रो. नारायण प्रसाद ने बताया है कि यहां पर मरीजों की डायलिसिस 2 से 3 शिफ्टों में की जाएगी। इसके लिए केंद्र में डिजिटल सबस्टेशन एंजियोग्राफी (डीएसए) और सी-आर्म की सुविधाओं से लैस दो शीर्ष श्रेणी के ऑपरेशन थिएटर हैं, इस अवसर पर एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो.आर के धीमन ने इस सेंटर की शुरूआत का श्रेय उत्तर प्रदेश सरकार को दिया है।

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