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अयोध्या में अवैध प्लाटिंग और अवैध कालोनियों की भरमार, विकास प्राधिकरण की शह पर चल रहा अवैध कारोबार

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अयोध्या। केन्द्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों की आंखों का तारा बनी अयोध्या में जमीन के धंधे के नाम पर जमकर अंधेरगर्दी मची हुई है। भू-माफिया, विकास प्राधिकरण, राजस्व, नजूल और तहसील के तगड़े काकस के सहारे अवैध प्लाटिंग से लेकर अवैध कालोनियां तक बसाने का सुनियोजित खेल खेला जा रहा है। यह हाल तब है जब प्रदेश सरकार ने हर विभाग में पारदर्शी व्यवस्था का फरमान दे रखा है। इसके बाद भी जमीन के अरबों खरबों के धंधे का सुनियोजित खेल खुलेआम खेला जा रहा है।

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एक अनुमान के अनुसार दोनों नगरों में मिला कर प्रापर्टी डीलरों की संख्या लगभग 45 है। इनमें से एक का भी रेरा में रजिस्ट्रेशन नहीं है। बिना रजिस्ट्रेशन के कोई भी प्रापर्टी डीलिंग का काम नहीं कर सकता है। सब प्रापर्टी डीलर अपंजीकृत हैं। इन्हीं प्रापर्टी डीलरों ने सुनियोजित ढंग से प्राधिकरण से मिलीभगत कर शहर के चारों ओर लगभग 30 से अधिक छोटी बड़ी कालोनियां बसा दी जिनका प्राधिकरण में कोई रेकार्ड ही नहीं है।

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इन प्रापर्टी डीलरों ने प्राधिकरण से न तो ले-आऊट पास कराया न प्राधिकरण इसे देखने तक गया। यह सब खेल प्राधिकरण के अधीन क्षेत्र में हुआ और अभी भी चल रहा है। गठजोड़ के कारण ही आज तक एक भी प्रापर्टी डीलर के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, अगर कुछ हुआ भी तो नोटिस का नाटक हुआ है।

बता दे कि देवकाली इलाके में बनी एक कालोनी में 80 मकान ऐसे हैं जिनका नक्शा तक प्राधिकरण से पास नहीं है। इसी कालोनी में एक बड़े प्रापर्टी डीलर का तिमंजिला मकान भी शामिल है। इधर चार पांच सालों में डूब क्षेत्र में बनाई गई कालोनियां पूरी तरह से अवैध हैं। वह भी प्राधिकरण की शह पर विकसित हो गईं जिन्हें लेकर अब प्राधिकरण घड़ियाली आंसू बहा रहा है।

कमाल तो यहां तक हुआ कि भूमिधरी की जमीन का सौदा कर बीस से अधिक प्लाट नजूल में नाप दिए गए। जिसमें लोगों ने अपने मकान बना लिए। बताया जाता है कि यहां प्राधिकरण का कुछ प्लाट पर ध्वस्तीकरण भी सुनियोजित खेल का हिस्सा है। इसके पीछे क्षेत्र में जमीनों का दाम बढ़ाने का खेल बताया जा रहा है। इस इलाके में कुछ नेता और अफसरों ने बड़ी बेनामी ढंग से लगाई है।

जमीनों के खेल में शामिल हैं कई विभाग

अयोध्या-फैजाबाद दोनों शहरों में चल रहे जमीनों के खेल में भू- माफिया, अयोध्या विकास प्राधिकरण, तहसील, राजस्व और नजूल विभाग शामिल हैं। बताया जाता है कि इन विभागों के अफसर से लेकर कर्मचारी तक इस काकस का हिस्सा हैं। बताया जा रहा है कि जब से अयोध्या सांसद लल्लू सिंह ने एसआईटी जांच की मांग को लेकर सीएम को पत्र लिखा है तब से हडकंप मचा है।

एसआईटी जांच हुई तो इन विभागों के बड़े अफसर, कर्मचारी यहां तक कि कई सफेदपोश नेता भी बेनकाब होगें। इस गठजोड़ ने जमीनों के खरीद – फरोख्त और अवैध प्लाटिंग में सरकार को अरबों रुपये के राजस्व का चूना लगाया है। यही कारण है कि अपनी गर्दन बचाने के लिए सभी जुगाड़ में लगें हुए हैं।

अवैध रूप से बनी कालोनी हो या प्लाटिंग प्राधिकरण चिन्हित कर कार्रवाई करेगा। अभी ध्वस्तीकरण को लेकर काम चल रहा है। 12 अगस्त को कार्यालय आईए वहीं पूरी जानकारी दे सकता हूं…गोर्की, नगर नियोजक, अयोध्या विकास प्राधिकरण, अयोध्या।

फैक्ट फाईल –
अपंजीकृत प्रापर्टी डीलर – करीब 45
अवैध कालोनियां – करीब 30
अवैध प्लाटिंग स्थल – करीब 150
जिम्मेदार विभाग – 3
(प्राधिकरण, नजूल, राजस्व, तहसील)

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