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लखनऊ। समाजवादी पार्टी का दंगल बढ़ता ही जा रहा है। रोज़ ही इसमें नए मोड़ आरहे है। बाप बेटे के बीच दूरियां बढती जा रही हैं। मुलायम-अखिलेश की इन दूरियोना से पार्टी पर भी गहरा असर पड़ा है। समाजवादी पार्टी हिस्सों में बात गई है। पार्टी के दो धड़े हो गए हैं और पटी टूटने की कगार पर है। पर इन सबके बवाज्प्प्ब कई लोग मुलायम अखिलेश की सुलह कराने में लगे हुए हैं। राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने मुलायम अखिलेश को मिलाने की कई कोशिशें करीं हैं। लालू ने खुद ही सीएम अखिलेश यादव को कॉल कर समझाया है नसीहत दी की उन्हें पिता मुलायम सिंह यादव से सुलह कर लेनी चाहिए।

अखिलेश ने प्रस्ताव ठुकराया

हालांकि, अखिलेश ने बड़ी विनम्रता से ‘नो थैंक्स’ कहकर कुछ ही मिनटों में उनका यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। बाद में लालू प्रसाद यादव ने मीडिया से बुधवार को कहा, ‘मैंने अखिलेश को देर रात फोन कर सलाह दी थी कि वह मुलायम सिंह यादव से सुलह कर ले, लेकिन मुझे निराशा हाथ लगी। लालू ने माना कि यदि मुलायम और अखिलेश का गुट अलग-अलग चुनाव लड़ेगा तो इससे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को ही फायदा होगा।

लालू की मजबूरियां

राजद सुप्रीमो ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यूपी चुनाव के बाद सब ठीक हो जाएगा। प्रदेश में अखिलेश की सरकार बनते ही मुलायम सिंह यादव की आदर के साथ समाजवादी पार्टी में अध्यक्ष पद पर जरूर वापसी होगी। दरअसल, लालू की इस पहल के पीछे सियासी मजबूरियों के अलावा कुछ और कारण भी है। लालू और मुलायम आपस में रिश्तेदार भी हैं. लालू की बेटी की शादी मुलायम के पोते तेजप्रताप यादव से हुई है। वैसे तेजप्रताप को अखिलेश का करीबी माना जाता है। वहीं, लालू प्रसाद यादव खुद को मुलायम सिंह के करीब मानते हैं। ऐसे में लालू के लिए असमंजस की स्थिति है कि वे मुलायम और अखिलेश में किनका साथ दें।

समाजवादी पार्टी के लिए अहम दिन

वैसे सपा में मचे घमासन पर कई बैठकों के बाद भी कोई तस्वीर सामने निकल कर नहीं आ पाई है। ऐसे में बुधवार (11 जनवरी) को समाजवादी पार्टी के लिए काफी अहम दिन माना जा रहा है। माना जा रहा है कि मुलायम सिंह कुछ कड़े फैसले ले सकते है। यही वजह है कि उनके आवास के बाहर कवरेज कर रहे पत्रकारों को संदेश मिला है कि वो बुधवार को औपचारिक बातचीत करेंगे। ऐसे में सूत्रों की माने तो अंदाजा लगा जा रहा है कि सपा में आर या पार की स्थिति पर फैसला हो सकता है।

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